Monday, April 15, 2013

किसी ने

चाहत की महफ़िल में बुलाया है किसी ने ..
खुद बुला कर फिर सताया किसी ने .
जब तक जली है शमा जलता रहा परवाना
क्या इस तरह साथ निभाया है किसी ने .
अरमान मेरे चूर चूर हो गए है 
 यूं खिल के आँगन से गिराया है किसी ने।
आग लगी है अन्दर कोई क्या बुझाएगा
दिल इस तरह से आज जलाया है किसी ने .
दिल रोता है रात भर याद कर के किसी को
इस तरह उल्फत में जखम खाया है किसी ने .
संगदिल जो था आज वोह भी रो पाता
आज उस को भी तडपाया है किसी ने .



No comments:

Post a Comment