सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

BanrAds Review, Bonus : Clickable Animated Ads

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रविवार, 14 सितंबर 2014

बाँसुरी चली आओ..


तुम अगर नहीं आयीं…गीत गा ना पाऊँगा.
साँस साथ छोडेगी सुर सजा ना पाऊँगा..
तान भावना की है..शब्द शब्द दर्पण है..
बाँसुरी चली आओ..होट का निमन्त्रण है..
तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है..
तीर पार कान्हा से दूर राधिका सी है..
दूरियाँ समझती हैं दर्द कैसे सहना है..
आँख लाख चाहे पर होठ को ना कहना है
औषधी चली आओ..चोट का निमन्त्रण है..
बाँसुरी चली आओ होठ का निमन्त्रण है
तुम अलग हुयीं मुझसे साँस की खताओं से
भूख की दलीलों से वक़्त की सजाओं ने..
रात की उदासी को आँसुओं ने झेला है
कुछ गलत ना कर बैठे मन बहुत अकेला है
कंचनी कसौटी को खोट ना निमन्त्रण है
बाँसुरी चली आओ होठ का निमन्त्रण है

बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है...

राज़ सारे जीवन के मैं, बस तुम्हें बताता था.

शब्दों में न कह पाऊँ वो, सुरों में सजाता था..

बिन तुम्हारे राग सारे, रागिनी को भूले हैं..

अब ना वो बहारें हैं ना, सावन के झूले हैं..

आँधी में फ़सी शम्मा को, ओट का निमंत्रण है..

बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

तन तुम्हारा अगर राधिका बन सके

तन तुम्हारा अगर राधिका बन सके, मन मेरा फिर तो घनश्याम होजायेगा।
मेरे होठों की वंशी जो बन जाओ तुम, सारा संसार बृजधाम हो जायेगा।

तुम अगर स्वर बनो राग बन जाऊँ मैं
तुम रँगोली बनो फाग बन जाऊँ मैं
तुम दिवाली तो मैं भी जलूँ दीप सा
तुम तपस्या तो बैराग बन जाऊँ मैं
नींद बन कर अगर आ सको आँख में, मेरी पलकों को आराम हो जायेगा।

मैं मना लूँगा तुम रूठ्कर देख लो
जोड लूँगा तुम्हें टूट कर देख लो
हूँ तो नादान फिर भी मैं इतना नहीं
थाम लूँगा तुम्हें छूट कर देख लो
मेरी धडकन से धडकन मिला लो ज़रा, जो भी कुछ खास है आम हो जायेगा।

दिल के पिजरे में कुछ पाल कर देखते
खुद को शीशे में फिर ढाल कर देखते
शांति मिलती सुलगते बदन पर अगर
मेरी आँखों का जल डाल कर देखते
एक बदरी ही बन कर बरस दो ज़रा, वरना सावन भी बदनाम हो जायेगा।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
डा० विष्णु सक्सेना

मंगलवार, 16 जुलाई 2013

पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है

 तूफ़ानी लहरें हों
अम्बर के पहरे हों
पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों
सागर के माँझी मत मन को तू हारना
जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है....!
राजवंश रूठे तो
... राजमुकुट टूटे तो
सीतापति-राघव से राजमहल छूटे तो
आशा मत हार, पार सागर के एक बार
पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है.....!
घर भर चाहे छोड़े
सूरज भी मुँह मोड़े
विदुर रहे मौन, छिने राज्य, स्वर्ण.रथ, घोड़े
माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे
पंचतत्व सौ पर है भारी, बतलाना है
जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है
पतझर का मतलब है, फिर बसंत आना है......!

एक चेहरा था ,दो आखेँ थीं

एक चेहरा था ,दो आखेँ थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे ,
इक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे...!
हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे ,
मन नहीं रमा तो नहीं रमा ,जग में कितने ही मेले थे ,
पर जिस दिन प्यास बंधी तट पर ,पनघट इस घट में अटक गया ,
एक इंगित ने ऐसा मोड़ा,जीवन का रथ पथ भटक गया ,
जिस "पागलपन" को करने में ,ज्ञानी-ध्यानी घबराते है ,
... वो पागलपन जी कर खुद को ,हम ज्ञानी-ध्यानी कर बैठे...!
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे ,
इक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे...!
परिचित-गुरुजन-परिजन रोये,दुनिया ने कितना समझाया
पर रोग खुदाई था अपना ,कोई उपचार न चल पाया ,
एक नाम हुआ सारी दुनिया ,काबा-काशी एक गली हुई,
ये शेरो-सुखन ये वाह-वाह , आहें हैं तब की पली हुई ,
वो प्यास जगी अन्तरमन में ,एक घूंट तृप्ति को तरस गए ,
अब यही प्यास दे कर जग को ,हम पानी-पानी कर बैठे....!
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे ,
इक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे...!
क्या मिला और क्या छूट गया , ये गुना-भाग हम क्या जाने ,
हम खुद में जल कर निखरे हैं ,कुछ और आग हम क्या जाने ,
सांसों का मोल नहीं होता ,कोई क्या हम को लौटाए ?
जो सीस काट कर हाथ धरे , वो साथ हमारे आ जाए ,
कहते हैं लोग हमें "पागल" ,कहते हैं नादानी की है ,
हैं सफल "सयाना" जो जग में , ऐसी नादानी कर बैठे........!
एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे ,
इक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे...!

शुक्रवार, 31 मई 2013

.....या रब्बा ऐसी ताकत देदे.....

ख्वाहिशे हो ऐसी जो आसमान को छूना चाहूँ
या रब्बा मुझे ऐसी ताकत देदे 
उडूं लेकर सपनो के पंख इन आसमानों में कही 
या रब्बा मुझे ऐसी ताकत देदे 
बस बहुत हुए दिन बचपन के खेल खिलोनो के 
अब दुनिया को अपनी पहचान दिखा दूं 
या रब्बा ऐसी ताकत देदे… 

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

काश हमें भी किसी परी से प्यार हो जाये

काश हमें भी किसी परी से प्यार हो जाये,
चाहे फिर हमारी जिन्दगी ही क्यू ना बेकरार हो जाये....

उसकी यादों में हर पल मैं खोया करूंगा
खुद से भी ज्यादा प्यार मैं उसे किया करूंगा
आज अकेला ही हूँ में एक सितारा, कल चार- चाँद हो जाए
काश हमें भी किसी परी से प्यार हो जाए ...

मैं तनहा ना फिर रहा करूंगा
ना खुद सोऊंगा ना उसे सोने दिया करूंगा
यारा ख्वाबों में ही सही दीदार हो जाये
काश हमें भी किसी परी से प्यार हो जाये ...

दूसरों को देख कर आता है ये खयाल मुझे
क्या मेरा भी सपना कभी पूरा होगा
मुझे चाहने वाला भी क्या कभी दूजा होगा
एक बार जीत जाऊ फिर हार ही क्यों ना हो जाये
काश मुझे भी किसी पारी से प्यार हो जाए ...

हालात ऐसे है के न शौक पूरे होते है, न तवज्जोह किसी बात पर
दोस्तों की माशूक से भी आता है मज़ा हर मुलाक़ात पर
अब नहीं होता है सब्र. हम पर भी कोई बस जान- निशार हो जाये
काश मुझे भी किसी परी से प्यार हो जाये…

किसी ने

चाहत की महफ़िल में बुलाया है किसी ने ..
खुद बुला कर फिर सताया किसी ने .
जब तक जली है शमा जलता रहा परवाना
क्या इस तरह साथ निभाया है किसी ने .
अरमान मेरे चूर चूर हो गए है 
 यूं खिल के आँगन से गिराया है किसी ने।
आग लगी है अन्दर कोई क्या बुझाएगा
दिल इस तरह से आज जलाया है किसी ने .
दिल रोता है रात भर याद कर के किसी को
इस तरह उल्फत में जखम खाया है किसी ने .
संगदिल जो था आज वोह भी रो पाता
आज उस को भी तडपाया है किसी ने .



मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

.....ज़िन्दगी क्या है .....

.....ज़िन्दगी क्या है .....

इक सोच जो किसी को समझ ना आई
इक एहसास जो किसी ने नहीं पहचाना 
इक ज़ज्बा जो कोई जुटा ना पाया
इक सपना जो कभी पूरा ना हो पाया 
इक कहानी जो रही हमेशा अधूरी
इक पहेली जो कभी सुलझ न सकी .....
.....फिर भी लोग जिए जा रहे है ....
इस सोच को  सोचने में खोकर 
इस एहसास को जिए जा रहे है ...
भले न जुटा पाए कोई ज़ज्बा 
पर रोज यही सपना जिए जा रहे है ...
कहानी भले ही रहे अधूरी उनकी 
पर पहेली में यूही उलझते जा रहे है ...
....फिर भी लोग जिए जा रहे है .....

रविवार, 12 अगस्त 2012

खुद को एक बार बदल डाला है...

एक मुस्कान सी होंठो पे सजा के,
हर बात को अपने दिल में छिपा के के,
मेने खुद को एक बार बदल डाला है...
कुछ यादों को दिल में बसा के के,
एक टीस को मन में दबा के,
मेने खुद को एक बार बदल डाला है...
एक आस सी कोई दिल में छिपी है,
एक प्यास सी कोई दिल में रुकी है,
सब कुछ यूहीं भुला के,
मेने खुद को बदल डाला है......

गुरुवार, 21 जून 2012

वही प्यार है....


जब दो दिल मिलके एक हो जाये,
दो नैना लड़ के चार हो जाये,
लफ्जो में जो ना हो बयां, वही प्यार है...

दीदार किसी का होता रहे,
बार-बार जब दिल ये कहे,
न कर पाए जब दिल की बात बयां, वही प्यार है...

गाना गुनगुनाने को जी करे,
हर पल मुस्कुराने को जी करे,
जब है ये मन झूम सा गया, वही प्यार है...

धड़कने जब किसी की धुन गए,
सांसे किसी के लिए बहक सी जाये,
दिल किसी के लिए जो थम सा गया, वही प्यार है...

किसी की बातो में खोने को जी करे,
किसी से बार-बार मिलने को जी करे,
लगे प्यारी जब किसी की हया, वही प्यार है...

किसी की सांसो में समाने को जी करे,
किसी की आँखों में खो जाने को जी करे,
किसी की अदा में जब मन खो गया, वही प्यार है...

ख्वाबो खयालो  में जब किसी का चेहरा आये,
जब किसी के बारे में सोचते हुए दिन गुजर जाये,
जब किसी पर सब कुछ कुर्बान हो गया, वही प्यार है...

किसी के पास आते ही धड़कने बढ जाये,
जब किसी की बाहों में संसार नजर आये,
प्यार में किसी के जब दिल काहिल हो गया, वही प्यार है...

जब किसी की दूरी बर्दास्त न हो,
दो घडी जब कभी बात ना हो,
किसी की खातिर जब ये दिल बेचैन हो गया, वही प्यार है...

जिस शब्द को अक्षरों के कुछ मेल,
 चाहे हो व्याकरण के कुछ खेल,
कर ना पाए कभी भी बयां, वही प्यार है....

शनिवार, 16 जून 2012

खिलखिलाना चाहता हूँ.....

अपने मन की उड़ानों से, आसमान छूने को जी करता है।
पर उन्ही ऊँचाइयों को सोच कर, जाने क्यों ये दिल डरता है।
हर पल दिखते अंधियारे से, मन बहुत घबराता है।
क्या पाना है और क्या खोना, बस यही सोचता रह जाता है।
अपने अन्दर डूब के मैं, खुद को खुद में ढूँढता हूँ।
ढून्ढ नही पाता फिर भी, जाने क्यू यू टूटता हूँ।
खो रहा हूँ जाने कही, इस जिंदगी की राहों  में।
अपने वो हसने की आदत, जाने क्यू मैं भूलता हूँ।
जीवन मेरा सीधा सा, क्यों चिंता में यू  बीत रहा।
घर की उल्झन मन की उल्झन, दम क्यू  मेरा घुट रहा।
जीवन की हर उलझन से मैं, मुक्ति पाना चाहता हूँ।
एक बार जी खोल के मैं, खिलखिलाना चाहता हूँ.....

रविवार, 10 जून 2012

खयाल

खयालो के बादल में एक अजीब सी  उलझन छाई है,
क्या बताऊ यारो किसी की याद इतनी  आई है ,
लम्हे नहीं गुजरते बिना किसीके दीदार के 
धड़कन ने भी अब तो धुन उसी की गाई  है,
हर लफ्ज होठो का सिर्फ नाम उसी का आता है,
ऐसा लगता है जैसे मेरी जान निकल आई है,
तू जहाँ भी है मुझे याद कर रहा है,
दिल की धड़कन इस बात का पैगाम लायी है,
तुझ तक पहुँच जाये मेरे दिल की आवाज,
बस मेरे दिल ने  से यही दुआ मनाई है...

शनिवार, 2 जून 2012

तुम नजर आते हो

लम्हे गुजरते है बस तेरे इंतजार मे,
हर पल तुम याद बहुत आते हो,
कब तक समझाउ इस पागल दिल को,
क्यूं दूर बहुत हो जाते हो,
लिखू क्या अपने दिल का हाल
इस छोटे कागज के टुकडे मे,
तुम कितना मुझे तडपाती हो,
तरस जाता हूँ एक मुलाकात को
और तुम अपनी आवाज के लिए तरसाते हो,
बता देते अगर हाल अपना मुझे,
तो मिल जाता सुकून दिल को,
पर जाने क्या मजबूरी है
जो दिल मेरा जलाते हो,
वैसे तो हर रात सपनो मे संग मेरे,
हसीन लम्हे बिताये,
पर जाने क्यूं सामने आने का मौका
नही दे पाते हो,
न कोई खबर तेरी, न कोई आहट
मेरे दिल की बेचैनी को और क्यू बढाते हो,
जब भी आती है याद बहुत,
आखो से आसू छलक जाते है,
और हर आसू की बूँद मे मुझे बस
तुम नजर आते हो.....
"कलरव ने सूनापन सौंपा ,मुझको अभाव से भाव मिले,
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले,
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना,
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना,
पीडा की इस मधुशाला में,आँसू की खारी हाला में,
तन-मन जो आज डुबो देगा,वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है,तब तक मुझको जीना होगा ....."

बुधवार, 30 मई 2012

एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान....

(तर्ज- श्याम तेरी बन्सी पुकारे राधा नाम)

सुनो एक मालिक की हम दो सन्तान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान...

एक जाये गंगा मे डुबकी लगाये,
एक जाये मक्का से जमजम ले आये,
एक के है राम, दुजे के रहमान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान...

एक जाये माता को चुनरी ओढाये,
दुजा जाये बाबा को चादर चढाये,
एक के नवरात्रे, दुजे के रमजान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान...

एक जाये मस्जिद और दुजा शिवालै,
यहाँ सर झुकाले या वहाँ सर झुकाले,
एक का है गीता, दुजे का कुरान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान...

सुनो एक मालिक की हम दो सन्तान,
एक बना हिन्दू, और एक मुसलमान....

~रवीन्द्र कुमार शर्मा (लखनऊ)~

प्यार हो जाये तो क्या करे....

दिल पर नही होता काबू किसीका
दिल खो जाये तो क्या करे
धीमे से कोई जादू चल जाये
और प्यार हो जाये तो क्या करे..

हौले हौले मद्धम मद्धम
चाहतो के सिलसिले शुरु होते है
इस चाहत को जो कोई रोक ना पाये
और प्यार हो जाये तो क्या करे....

कहते है लोग कि प्यार ना करना
प्यार मे लोग दीवाने हो जाते है
लेकिन ये दीवानगी ही जो लुभाने लगे
और प्यार हो जाये तो क्या करे...

मदहोशी में दिल को पाया
और दवा ना कोई काम आयी
लेकिन मदहोशी को जो मन्जिल समझे
और प्यार हो जाये तो क्या करे...

दिल के दरवाजे बन्द किये है
कि दिल मे ना कोई बस जाये
लेकिन ये दिल ही जो ना रहे अपना
और प्यार हो जाये तो क्या करे...

समझे तो है बहुत कुछ समझना
लेकिन जज्बातों की है कहा वजह कोई
बेवजह जो कोई भाने लगे
और प्यार हो जाये तो क्या करे....

दुआ तो हम भी कर सकते है
कि प्यार नही करेगे हम
पर प्यार पर कहा चलता है जोर किसिका
जो प्यार हो जाये तो क्या करे....

चलिये, प्यार से बेखबर हो जाते है हम
प्यार नही हमें ये सोच लेते है हम
लेकिन गर प्यार बसा रहे इस दिल एत
तो इस प्यार का हम क्या करे....

भूलने को तो हम प्यार को भूल जाये
प्यार के साथ देखे हर ख्वाब को भूल जाये
लेकिन दिल पर कहा चलता है जोर किसीका
इस दिल का कहो हम क्या करे...

दिल पर नही चलता जोर किसीका
दिल खो गया हमारा अब हम क्या करे
धीमे से कोई जादू चल गया
और प्यार हो गया अब हम क्या करे.........?

बुधवार, 23 मई 2012

पगली लड़की



अमावास की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,
जब दर्द की प्याली रातों में गम आंसूं के संग होते हैं,
जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं,
जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं, सब सोते हैं, हम रोते हैं,
जब बार बार दोहराने से साड़ी यादें चुक जाती हैं,
जब ऊँच-नीच समझाने में माथे की नस दुःख जाती हैं,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है.

जब पोथे खली होते हैं, जब हर सवाली होते हैं,
जब ग़ज़लें रास नहीं आतीं, अफसाने गाली होते हैं.
जब बासी फीकी धुप समेटें दिन जल्दी ढल जाता है,
जब सूरज का लश्कर छत से गलियों में देर से जाता है,
जब जल्दी घर जाने की इच्छा मन ही मन घुट  जाती है,
जब कॉलेज से घर लाने वाली पहली बस छुट जाती है,
जब बेमन से खाना खाने पर माँ  गुस्सा हो जाती है,
जब लाख मन करने  पर भी पारो पढने आ जाती है,
जब अपना मनचाहा हर काम कोई लाचारी लगता है,

तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है....


जब कमरे मे सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है,
जब दर्पण मे आँखो के नीचे झॉई दिखाई देती है,
जब बडकी भाभी कहती है, कुछ सेहत का भी ध्यान करो
क्या लिखते हो दिनभर, कुछ सपनो का सम्मान करो,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते है,
जब बाबा हमें बुलाते है, हम जाते है, घबराते है,
जब साडी पहने लडकी का एक फोटो लाया जाता है,
जब भाभी हमे मनाती है, फोटो दिखलाया जाता है,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है....


दीदी कहती है उस पगली लडकी की कुछ औकात नही,
उसके दिल मे भैया तेरे जैसे प्यारे जज्बात नही,
वो पगली लडकी नौ दिन मेरे खातिर भूखी रहती है,
छुप–छुप सारे व्रत करती है, पर मुझसे कभी ना कहती है,
जो पगली लडकी कहती है, मै प्यार तुम्ही से करती हूँ,
लेकिन हूँ मजबूर बहुत, अम्मा–बाबा से डरती हूँ,
उस पगली लडकी पर अपना कुछ अधिकार नही बाबा,
ये कथा–कहानी किस्से है, कुछ भी तो सार नही बाब,
बस उस पगली लडकी के संग जीना फुलवारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है.

~ Dr. Kumar Vishwas ~

प्यार किसी से करती थी...!!

ख्वाबों की एक बस्ती थी
एक लडकी उसमें रहती थी...!!

अपने घर के आगन मे
कुछ सपने बोया करती थी...!!

अपने कमरे की खिडकी मे
बूँदों से खेला करती थी...!!

सबके सामने हसती थी और
चुप चुप के रोया करती थी...!!

चॉद को कही देर तक
वो अक्सर घूरा करती थी...!!

देखने वाली सब ऑखो को
कॉच की गुडिया लगती थीं...!!

टूट गयी तो सब ने जाना
वो पगली, प्यार किसी से करती थी...!!

तुम


मेरे दिल मे बसी एक हसरत हो तुम
मेरी ऑखों को मिली शरारत हो तुम,

देखूँ तुम्हे तो पालूँ मै ये दुनिया,
ना मिलो तो मिलने की बगावत हो तुम,

तुम्हारी खामोशी कह जाती है कई बातें
जिसे याद करता है दिल कई रातें,

तुम्हारे नन्हे नन्हे से हाथ और बडी बडी बातें
याद रह जाती है तुमसे हुई मुलाकातें,

उम्मीद हो हमारी आनेवाला कल हो तुम,
हमारे दिल मे बसी मोहब्बत हो तुम.....