शुक्रवार, 18 मई 2012

वादा करो़

खुश्बुओ की तरह मेरी हर सॉस मे
प्यार अपना बसाने का वादा करो,
रंग जितने तुम्हारी मोहब्बत के हैं
मेरे दिल मे सजाने का वादा करो़..

है तुम्हारी वफाओं पे मुझको यकीन,
फिर भी दिल चाहता है मेरे दिल नशीन
यूही मेरी तसल्ली की खातिर जरा
मुझको अपना बनाने का वादा करो..

जब मोहब्बत का इकरार करते हो तुम
धडकन मे नया रंग भरते हो तुम,
पहले भी कर चुके हो मगर आज फिर
मुझको अपनाने का वादा करो..

सिर्फ लफ्जो से इकरार होता नही,
हर एक से प्यार होता नही,
मै तुम्हे याद रखने की खाऊ कसम
तुम मुझको ना भुलाने का वादा करो...

बुधवार, 2 मई 2012

तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा

ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही..
ओ अमलताश की अमलकली.
धरती के आतप से जलते..
मन पर छाई निर्मल बदली..
मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.
तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
मैं धरती का अदना गायक
तुम जीवन के उपभोग योग्य
मैं नहीं स्वयं अपने लायक
तुम नहीं अधूरी गजल सुभे
तुम शाम गान सी पावन हो
हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
तुम जिस शय्या पर शयन करो
वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आँगन की हो मौलश्री
वह आँगन क्या व्रन्दावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ
वे अधर नहीं गंगातट हों
जिसकी छाया बन साथ रहो
वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
मै तुमको चाँद सितारों का
सौंपू उपहार भला कैसे
मैं यायावर बंजारा साँधू
सुर श्रंगार भला कैसे
मैन जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ सुभे
बारूद बिछी धरती पर कर लूँ दो पल प्यार भला कैसे
इसलिये विवष हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा

गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आंखे


हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आंखे,
हम खुद में कितना उतरे, हम खुद में कितना झांके,
हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आंखे..
हर बार यही लगता है, अब कुछ भी याद नहीं है,
हर बार गुमा होता है, कोई फैयाद नहीं है,
हर बार उम्मीदों वाली, सुबह आकार कहती है,
तुमसे बाहर आने में, अब कोई विवाद नहीं है,
पर कभी फूट पड़ती है, आँखों के सूखे जल में,
हर बार तुम्हारी कोमल, हर बार तुम्हारी शाखे,
हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आंखे.
हर बार हमी ने गाया दुनिया का दर्द कुवारा,
हर बार पिया है हस कर आसू का सागर सारा,
थक कर सोये है जब जब नींदों की हदबंदी में,
हर बार छलक जाता है आँखों से ख्वाब तुम्हारा,
मन पाखी ने जब चाहा इच्छा का अम्बर छूना,
हर बार उड़ाने उमड़ी हर बार कटी है पाखे,
हर बार तुम्हारा चेहरा हर बार तुम्हारी आंखे........
- डा ०  कुमार  विश्वास   

होठो पर गंगा हो, हाथो में तिरंगा हो....


शोहरत न अता करना मौला, दौलत न अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे, जन्नत न अता करना मौला,
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब, कुर्बान पतंगा हो.
होठो पर गंगा हो, हाथो में तिरंगा हो......

बस एक सदा ही सुने सदा, बर्फीली मस्त हवाओ में,
बस एक दुआ ही उठे सदा, जलते तपते सहराओ में,
जीते जी इसका मान रखे, मर कर मर्यादा याद रहे
हम रहे कभी न रहे मगर, इसकी सजधज आबाद रहे.
गोधरा न हो, गुजरात न हो इंसान न नंगा हो,
होठो पर गंगा हो, हाथो में तिरंगा हो.......

गीता का ज्ञान सुने न सुने, इस धरती का यशगान सुने,
हम सबद-कीर्तन सुन न सके, भारत माँ का जयगान सुने,
परवरदिगार मैं तेरे द्वार पर ले पुकार ये कहता हूँ
चाहे अजान न सुने कान, पर जय-जय हिन्दुस्तान सुने
जन-मन में उत्छल देशप्रेम का जलधि तरंगा हो
होठो पर गंगा हो, हाथो में तिरंगा हो.......
होठो पर गंगा हो, हाथो में तिरंगा हो...............

शनिवार, 3 मार्च 2012

♥~~MY YARA G~~♥

‎जिस घड़ी उसको मेरे रब ने बनाया होगा ,
उसका सिंगार फरिस्तो से कराया होगा ,
उसकी जुल्फों को घटाओ में भिगोया होगा ,
उसकी आँखों को झीलों सा गहरा बनाया होगा ,
उसके होंठो पर गुलाबो को निचोड़ा होगा ,
चाँद के नूर से उसको नहलाया होगा ,
सारी परियो ने मिलके उसको सजाया होगा ,
सारी कलियों का तसव्वुर उसको बक्शा होगा ,
कोयल का कर्नुर उसको सौपा होगा ,
उसकी पलकों पर सितारों को सजाकर ,
रब ने सारी दुनिया से जुदा बनाकर ,
हुस्न का नाम किताबो से मिटाया होगा....